यादों कि सुर्ख पंखुड़ियां .......!!!
बस एक ख़ामोशी ..... और कहने को क्या है .......!
मंगलवार, 11 अगस्त 2009
तेरे आना
तुमको देखा और देखती ही रही....
शाम-ओ-शहर यु ही गुज़रती रही.........
पलकों पर तेरे खवाब यु ही आती और जाती रही....
तू आया तो भी तेरे न आने के phareb
में जीती और मरती रही.....
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