मंगलवार, 11 अगस्त 2009

तेरे आना

तुमको देखा और देखती ही रही....
शाम-ओ-शहर यु ही गुज़रती रही.........
पलकों पर तेरे खवाब यु ही आती और जाती रही....
तू आया तो भी तेरे न आने के phareb में जीती और मरती रही.....

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