कुछ सादे पन्नो को देख खुद को रोक नही पाई और जो मन में भाव आये लिख डाले !!!
जब भी मिलती हूँ तुझसे ए कोरे कागज़ मेरे अलफ़ाज़ छलक ही जाते हैं
दिल के कोने में जो छुपे रहतें हैं जज़्बात तुझ पर बिखर ही जाते हैं
मेरी शोखियाँ मेरी ही शरारत रुत -ए-बहार बन रुखसार पर झलक ही आते हैं
गाहे-गाहे तहे मन के मौजे बहार बन अरसा -ए -आलम (whole word) पर छा ही जाते हैं
जब भी हुआ जिस्म मेरा खास्तापा (tired) कोई न कोई मुकाम राह आ ही जाते हैं
जब भी किया किसी से कतरे भर क़ि उम्मीद वो तहलील ख्यालात थमा जाते हैं
नज़र करती हूँ खुद को ही अपने ही ऐब और आसार (impression) दिल -ए -जूनून पर मुस्कुरा जाते हैं
दिल क़ि ख्वाइश शब् भर तुझसे तकल्लुम (conversation) के ख़ुशी में अश्क आमेज़ हो ही जाते हैं
चिनार क़ि दरखत के पत्तों से झरोखे तक छन के आती धूप ये नीम क़ि ठंडी छावं
देश परदेश जाए कहीं भी फिजा पर यादों के बादल उमड़ ही आते हैं
महफ़िल ही नही हिज्र के मौसम में भी हर हार्फ़ अपनी गोयाई दिखा ही जाते हैं
कुर्बान जाऊं हर हार्फ़ हर ज़ज्बात पर जो हर हाल में जीने क़ि अदा सीखा ही जाते हैं
दिल -ए -गुलिस्तान में तमन्ना मचलती है आरमां भी पिघल ही जाते हैं
ओस क़ी बूंद पत्तों पर ठहरा देख कुछ लम्हात तबियत मरगूब (Like) कर ही जाते हैं
रुत पीले पत्तों क़ी शाम पुरवाई कार -ए -मोहब्बत से सरापा भर ही जाते हैं
फलक क़ी सुहानी जार शब् तक पिघल रंगत -ए -चांदनी ले आसूदा -ए -बिनाई (satisfaction of sight) में बदल जाते हैं
सारा
जब भी मिलती हूँ तुझसे ए कोरे कागज़ मेरे अलफ़ाज़ छलक ही जाते हैं
दिल के कोने में जो छुपे रहतें हैं जज़्बात तुझ पर बिखर ही जाते हैं
मेरी शोखियाँ मेरी ही शरारत रुत -ए-बहार बन रुखसार पर झलक ही आते हैं
गाहे-गाहे तहे मन के मौजे बहार बन अरसा -ए -आलम (whole word) पर छा ही जाते हैं
जब भी हुआ जिस्म मेरा खास्तापा (tired) कोई न कोई मुकाम राह आ ही जाते हैं
जब भी किया किसी से कतरे भर क़ि उम्मीद वो तहलील ख्यालात थमा जाते हैं
नज़र करती हूँ खुद को ही अपने ही ऐब और आसार (impression) दिल -ए -जूनून पर मुस्कुरा जाते हैं
दिल क़ि ख्वाइश शब् भर तुझसे तकल्लुम (conversation) के ख़ुशी में अश्क आमेज़ हो ही जाते हैं
चिनार क़ि दरखत के पत्तों से झरोखे तक छन के आती धूप ये नीम क़ि ठंडी छावं
देश परदेश जाए कहीं भी फिजा पर यादों के बादल उमड़ ही आते हैं
महफ़िल ही नही हिज्र के मौसम में भी हर हार्फ़ अपनी गोयाई दिखा ही जाते हैं
कुर्बान जाऊं हर हार्फ़ हर ज़ज्बात पर जो हर हाल में जीने क़ि अदा सीखा ही जाते हैं
दिल -ए -गुलिस्तान में तमन्ना मचलती है आरमां भी पिघल ही जाते हैं
ओस क़ी बूंद पत्तों पर ठहरा देख कुछ लम्हात तबियत मरगूब (Like) कर ही जाते हैं
रुत पीले पत्तों क़ी शाम पुरवाई कार -ए -मोहब्बत से सरापा भर ही जाते हैं
फलक क़ी सुहानी जार शब् तक पिघल रंगत -ए -चांदनी ले आसूदा -ए -बिनाई (satisfaction of sight) में बदल जाते हैं
सारा
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